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सभापति महोदय, बहुत कम हुआ है कि सारे भारतवर्ष के प्रतिनिधियों को एक जगह एकत्रित होने का ऐसा अवसर जैसा आज मिला है। कहीं विधानसभा में कहीं संसद में कहने को तो आज भारत के ही हम सब प्रतिनिधि है लेकिन जो विशाल प्रतिनिधित्व आज मैं अपने सामने देख रहा हूं जिसमें जीवन का एक ..

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सभापति महोदय, बहुत कम हुआ है कि सारे भारतवर्ष के प्रतिनिधियों को एक जगह एकत्रित होने का ऐसा अवसर जैसा आज मिला है। कहीं विधानसभा में कहीं संसद में कहने को तो आज भारत के ही हम सब प्रतिनिधि है लेकिन जो विशाल प्रतिनिधित्व आज मैं अपने सामने देख रहा हूं जिसमें जीवन का एक स्पंदन सारे भारत के हृदय की धड़कन है। वह मैं देख रहा हूं। शायद अन्यत्र ऐसा दृश्य नहीं मिलता इसलिए आप सब को फिर एक बार मैं हृदय से कहना चाहता हूं कि यह साक्षात्कार आपका और हमारा हो रहा है। यह एक नए इतिहास की नींव डालता है। यह एक नए इतिहास का प्रतीक है। यदि कहा जाए कि सन् 1947 के बाद भारत की कोटि-कोटि जनता को और एक बार स्वतंत्रता मिली है और एक बार स्वराज मिला है और सच्चा स्वराज मिला है जिसका वे अनुभव कर सकते हैं, जिसको वे उपयोग कर सकते हैं तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी।

हमारे संविधान में हमारे संविधान बनाने वालों ने यह अनुभव किया था कि खाली संसद बनने से और विधानसभाओं के बनने से हमारा स्वराज्य पूरा नहीं हो सकता। हमारे स्वराज्य का ढांचा हमारी संसद का ढांचा पूरा नहीं होता लेकिन उनके पास समय नहीं था, उनको चार वर्ष में संविधान बनाना था इसलिए उन्होंने उसको बनाया।केंद्र और राज्य स्तरों पर बनाया और उसके आनुषंगिक जो भी संस्थाएं और संगठन हो सकते थे, जिनकी कल्पना की जा सकती थी जैसे – उच्चतम न्यायालय, उच्च न्यायालय और लोक सेवा आयोग। इन सारी चीजों की कल्पना करके उन्होंने संविधान बनाया लेकिन बहुत कुछ उनको छोड़ देना पड़ा। चार वर्ष में वे पूरा नहीं कर सकते थे। इसके कई कारण थे। संविधान सभाओं की चर्चाओं में कई बातें आ गई थी। किसी ने कहा था कि इसकी क्या आवश्यकता है? किसी ने कहा इसकी बड़ी आवश्यकता है इसलिए उन्होंने कुछ निर्देशक सिद्धान्त दिए। कुछ ऐसे सिद्धान्त दिए जिसके अनुसार सरकारों को आगे कार्य करना था। उन्होंने कहा कि यह आप कीजिए। उनमें से पंचायती राज एक है। उन सिद्धान्तों में यह भी है कि जितना शीघ्र हो सके यहां पंचायती राज संस्थाएं स्थापित हों। आज मैं आपको एक छोटा सा उदाहरण देता हूं। हमने अपने लिए लोकतांत्रिक पद्धति चुनी, अपनाई लेकिन लोकतात्रिक पद्धति का क्या आशय होता है?

 

कठिन शब्द

राष्ट्रपति महोदय

मूर्त रूप

परिणत

पहाड़ी क्षेत्र

भूमिहीन

चप्पा

सड़ते

सार्वजनिक

सद्भाव

महाराष्ट्र

उत्तर प्रदेश

बिहार

बांध

विश्व बैंक

वाक्यांश

समर्थन करने के लिए

प्रारम्भ कर दिए हैं

सबसे बड़ी बात तो यह है कि

गरीबी हटाओ, गरीबी मिटाओ

दे दिया है

दिया गया है

प्रयत्न करें

हल करने के लिए

आश्वासन दिया था

भूमि समस्या

जैसा कि मैं देख रहा हूं

औद्योगिक नीति

 

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