100 wpm Hindi dictation #51&52 with PDF File, Hindi steno dictation

100 wpm Hindi dictation free download

SSC Steno Grade C Model Dictation for Shorthand Skill Test 100 wpm Hindi Steno  Dictation with Text/PDF Transcriptions for SSC Steno High Court Steno & CRPF ASI (Steno) skill tests.

महोदय, योजना पर वाद-विवाद सच्चे अर्थ में एक राष्ट्रीय विचार-विमर्श का अवसर है और मुझे प्रसन्नता है कि सदस्यों ने इसे गंभीरता-पूर्वक लिया है, हालाँकि इसकी आलोचना भी बहुत हुई है। ऐसी आलोचना सुनने के हम अभ्यस्त हो चुके हैं। पहले इसका लक्ष्य योजना का विचार ही हुआ करता था। सौभाग्य से वह बात अब नहीं रह गई है और हम विकास की ऐसी सीढ़ी पर पहुँच चुके हैं जब मुझे आशा है कि सभी दल योजना के विचार का अनुमोदन करते हैं। कुछ ने योजना के कुछ अंशों का अनुमोदन किया है

महोदय, योजना पर वाद-विवाद सच्चे अर्थ में एक राष्ट्रीय विचार-विमर्श का अवसर है और मुझे प्रसन्नता है कि सदस्यों ने इसे गंभीरता-पूर्वक लिया है, हालाँकि इसकी आलोचना भी बहुत हुई है। ऐसी आलोचना सुनने के हम अभ्यस्त हो चुके हैं। पहले इसका लक्ष्य यौचना का विचार ही हुआ करता था। सौभाग्य से वह बात अब नहीं रह गई है और हम विकास की ऐसी सीढ़ी पर पहुँच चुके हैं जब मुझे आशा है कि सभी दल योजना के विचार का अनुमोदन करते हैं। कुछ ने योजना के कुछ अंशों का अनुमोदन किया है औऱ अपनी आलोचना अनेक कार्यक्रम को लागू करने के तरीके के लिए सुरक्षित रखी है। कई सदस्य ऐसे हैं जो योजना के हमारे ढंग को बिल्कुल पसंद नहीं करते।

अब यह स्पष्ट है कि हम में से प्रत्येक, व्यक्ति के रूप में नहीं, बल्कि दल के प्रतिनिधि के रूप में कुछ विचारों के पक्ष में हैं और कार्य-संचालन के किन्हीं विशेष तरीकों को पसंद करता है। हमने पर्याप्त विचार-विमर्श और सोचने-समझने के बाद यह निश्चय किया है कि हमें किस प्रकार का योजना आयोग बनाना चाहिए और आयोग को किस ढंग से काम करना चाहिए। योजना आयोग में निर्दलीय, स्वतंत्र विचारों वाले और गैर-राजनीतिक विशेषज्ञ होते हैं, लेकिन वे पूरी तरह से योजना के लिए ज़िम्मेदारी नहीं होते। योजना का निर्माण प्रत्येक राज्य के विभिन्न स्तरों के लोगों के साथ अनेक विचार-विनिमयों के आधार पर होता है और अंततः उसे अंतिम रूप देने के लिए राष्ट्रीय विकास परिषद में प्रस्तुत किया जाता है जिसके अंतर्गत सभी मुख्यमंत्री होते हैं, जिनमें अनेक अन्य दलों के भी होते हैं। वे मिल बैठकर अपने विचार व्यक्त करते हैं। यह ठीक है कि इन बैठकों में मतभेद भी होता है जो सामान्यतः योजना के तरीकों को लेकर नहीं, बल्कि अधिकांशतः इस पर होता है कि किस राज्य को कितना पैसा मिलना चाहिए। हम जानते हैं कि हमारा कोई भी ऐसा कार्यक्रम नहीं है जो हमारी पूरी जनसंख्या की आवश्यकता के लिए पर्याप्त हो। सभी समय उपलब्ध साधनों और जनता की आवश्यकता के बीच सामंजस्य के लिए प्रयास करना होता है। यह सोचना होता है कि क्या किया जाना चाहिए अथवा एक-दूसरे क्षेत्र के लिए क्या किया जाना चाहिए। कुल मिलाकर यह योजना अगले चार वर्षों के लिए प्रगति का घोषणा पत्र है। हमें कुछ अनुमान है।

महोदय, यद्यपि योजना के अंतिम रूप पर यह औपचारिक बहस अब हो रही है, हमने योजना के प्रारूप के बारे में काफी ब्यौरे-वार विचार किया था। एक माननीय सदस्य ने कहा है कि योजना से ऐसा नहीं लगता कि कामों को निपटाने में तत्परता जरूरी है। मैं समझती हूं कि योजना के प्रारूप और उसके अंतिम रूप में यही अंतर है। अंतिम रूप में हमने तात्कालिकता पर जोर दिया है, जिसका प्रमाण यह है कि उसमें आज की प्रमुख समस्याओं की पहचान की गई है, जैसे बेरोज़गारी या क्षेत्रीय असंतुलन अथवा अन्य ऐसी ही बातें। इनमें से कुछ समस्याओं के समाधान में कोई विलम्ब नहीं होना चाहिए और उन्हें तत्काल दृढ़ निश्चय के साथ हल किया जाना चाहिए। लेकिन कुछ परिस्थितियाँ ऐसी होती हैं जिनमें हमें काम करना होता है। कुछ मान्य तरीके हुआ करते हैं। इनमें से एक है लोकतंत्रीय प्रक्रिया। बहुत से लोग चाहते हैं कि हम कई काम एक साथ करें और इनमें से कुछ के बारे में हम सहमत भी हैं कि वे सही काम हैं। लेकिन हम लोकतंत्री प्रक्रिया के प्रति वचनबद्ध हैं, हमें अधिकाधिक जनता और पार्टियों को अपने साथ लेकर आगे बढ़ना है। मैं समझती हूँ कि अगर इससे हमारी गति कुछ धीमी भी रहती है, तो भी हमारी प्रक्रिया को बल मिलता है और हम जो भी काम हाथ में लेते हैं, उसे बल मिलता है।

दूसरा तरीका मिश्रित अर्थव्यवस्था का है जिससे शायद कुछ लोग सहमत नहीं हैं लेकिन जिसे हमने अपने लिए निर्धारित किया है। ऐसी अर्थव्यवस्था की अनेक त्रुटियां भी होती हैं, लेकिन हमारे देश में आज जो परिस्थिति है, उसमें हमारी सरकार, हमारे पूर्ववर्तियों और आज के सहयोगियों ने यह अनुभव किया है कि हमें इस तरीकों को अपना कर चलना चाहिए। मिश्रित अर्थव्यवस्था का अर्थ मेरी समझ से यह नहीं है कि कुछ समृद्ध परिवारों को इसका लाभ मिलता रहे। कृषि या लघु उद्योग जैसे अनेक क्षेत्र कमजोर वर्गों के लाभ के लिए निजी क्षेत्र में रखे गए हैं और हमारी मिश्रित अर्थव्यवस्था के अंतर्गत अपने लिए लोगों को अनेक कार्यक्रम अपने हाथ में लेने के अलावा उनमें अपने लिए काम करना चाहिए। मुझे मालूम है कि स्वाधीनता के तुरंत बाद जो स्थिति उत्पन्न हुई थी, उसका कुछ परिवारों, ग्रुपों, व्यावसायिक घरानों ने निजी स्वार्थ के लिए लाभ उठाया।

कठिन शब्द
  • वाद-विवाद
  • गंभीरता-पूर्वक
  • सीढ़ी
  • सुरक्षित
  • प्रतिनिधि
  • कार्य-संचालन
  • विचार-विमर्श
  • सोचने-समझने
  • योजना आयोग
  • निर्दलीय
  • गैर-राजनीतिक
  • विशेषज्ञ
  • राष्ट्रीय विकास परिषद
  • विचार-विनिमयों
  • घोषणा पत्र
  • औपचारिक
  • ब्यौरे-वार
  • क्षेत्रीय असंतुलन
  • तात्कालिकता
  • दृढ़-निश्चय
  • वचनबद्ध
  • मिश्रित अर्थव्यवस्था
  • त्रुटियां
  • लघु उद्योग
  • व्यावसायिक घरानों
  • विलम्ब

वाक्यांश
  • मुझे प्रसन्नता है कि
  • हो चुके हैं
  • अनुमोदन करते हैं
  • पहुँच चुके हैं
  • मुझे आशा है
  • बिल्कुल पसंद नहीं करते
  • यह स्पष्ट है
  • यह निश्चय किया है
  • किस प्रकार का
  • काम करना चाहिए
  • प्रस्तुत किया जाता है
  • विचार व्यक्त करते हैं
  • हम जानते हैं
  • क्या किया जाना चाहिए
  • विचार किया था
  • मैं समझती हूँ
  • काम करना होता है
  • यह अनुभव किया है
  • मुझे मालूम है कि

Stay Up To Date With The Latest Updates and Event Info